
कोई बग़ीचा बता दो, जहाँ गुलाब में काँटे न हों,
चन्दन का वृक्ष जहाँ हो, पर विषधर लिपटे न हों।
जिस बाग को सीचने बाला माली न हो, वह बाग खिलखिलाता हो,
हवाओं में महक ऐसा हो, जैसे मीठे गीत गाते न हों।
कोई ऐसा पतझड़ बता दो, जिसका शाखा न हो,
जिसमें जड़ें भी न हो, पर पत्ते सावन को गाते न हों।
एक ऐसा गुलशन बता दो, जिस पर भाबरा मंडराता न हो,
जहाँ हर साया सुकून दे, और आँखों में आँसुओं के लहू न हों।
आर एस लॉस्टम












