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कविता

मिठाई की सीख हम लोग दिवाली में,

एक दूसरे को मिठाइयाँ देंगे। मिठाइयों से भी सीख सकते हो, रस गुल्ला क्या कहता है? रस गुल्ला कहता हैं कि, आपको कितना भी निचोड़ लिया जाए । लेकिन आपको थोड़ी देर में बाद, आपको अपने मूल स्वरूप में आ जाना चाहिए। जलेबी क्या कहती है? आपका स्वरूप मायने नहीं रखता, आपके भीतर रस रहना चाहिए। यदि आपके भीतर रस है तो, दुनिया आपकी इज्जत करेगी, ये बात हमेशा याद रखियेगा। बूँदी का लड्डू क्या कहता है? छोटे छोटे प्रयासो से भी बड़ा बना जा सकता है। एक मिठाई है, जिसको कहते सोनपापड़ी । तो वो क्या कहती हैं? जानते है , कोई पूछे या न पूछे, हम पहले भी थे, आज भी है और कल भी रहेंगे। काजू कतली कहती है कि, आप अपने आप को इतना सस्ता मत कर लो, कि रास्ते चलता हुआ आदमी, आपका भाव जान ले। आपके अंदर की गुणवत्ता, इतनी अच्छी होनी चाहिए कि, मर्खिडीज से उतर कर आदमी को, शोरूम में जाना पड़े, और उससे पूछना पड़े कि, काजू कतली का भाव क्या है?

कविता रचनाकार- नंदकिशोर गौतम (माध्यमिक शिक्षक) शास. उच्च. माध्य. विधा. बकोडी जिला सिवनी (म.प्र.)

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