Uncategorized
Trending

कविता

उजियारा करना हर तिमिर का,अमावस चाहे घोर हो काली,
अंधेरों से उजियारे को बढ़ना,लगे कि मनाने चले दीवाली।।

उस घर की सुधि जरूर ही लेना,वर्ष भर जिनकी रात दिन काली,
एक दीप वहा रोशन करना,होनी तभी है सच्ची दिवाली।।

भूख से त्रस्त,किसी पेट को जब तुम दे रोटी शांत करोगे,
जानते नही हो बन कर राम,तुम ,रावण का वध आप करोगे।।

रोटी ही है जिनकी मिठाई, और भूख जिनकी अमावस्या,
ऐसी क्षुधा को तृप्त तुम करना,की भूख की रहे न कोई समस्या।।

करना ही जो दीपोत्सव है,तो दीप जलाना खुशियो वाली,
इक घर के चाहे तिमिर को हरना ,कि लगे मनाने चले दिवाली।।

देना संदेश अच्छाई की जीत का,अंधेरों से उजियार को बढ़ना,
प्रेम की धार सदैव बरसाना, देखो नफ़रत कभी न करना।।

संदीप शर्मा सरल
देहरादून उत्तराखंड

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *