
अभी इंतज़ार तेरा बाकी है,
जो मेरी आँखों को सुकून दे सके —
वो प्यास अभी बाकी है।
पूरा घर खामोश है,
पर इन खामोशियों में भी
तुझसे मिलने की आस अभी बाकी है।
आज मेरी गली में सन्नाटा है,
पर मेरे घर में कुछ हलचल है,
एक अनकहा एहसास मन में —
तुमने कहा था, “एक दिन मैं आउंगी”,
तो वो उम्मीद… वो विश्वास अभी बाकी है।
मुझे अभी नहलाया जा रहा है,
फिर सजाया जाएगा, नया कपड़ा पहनाया जाएगा,
कुछ अपने रोएंगे, कोई लिपटकर प्रेम जताएगा,
फिर मुझे चार कंधों पर उठाया जाएगा —
और आज, बिना डरे… सीना ताने मैं जाऊँगा।
पर जो तुझसे कह न सका ज़ीते जी,
वो अधूरी बात, वो तृष्णा, वो एहसास,
मुझे तेरा फ़िक्र था… और प्रेम भी था —
बस, वो कहना अभी बाकी है।
हो सके तो अपनी गली के उस कोने पर आ जाना,
अपनी झलक ज़रा दिखला जाना;
पता नहीं अब मैं तुम्हें कब देखूँगा…
बस एक बार — अंतिम बार,
इन आँखों की प्यास बुझा जाना,
वो अंतिम भेंट की इच्छा… अभी बाकी है।
आर एस लॉस्टम













