
तीव्रसंवेगानामासन्नः ।
तीव्रसंवेगानाम्= जिनके साधन की गति तीव्र है, उनकी {निर्बीज समाधि} आसन्नः= शीघ्र {सिद्ध} होती है ।
अनुवाद– जिनके साधन की गति तीव्र है, उनकी निर्बीज समाधि शीघ्र होती है ।
व्याख्या– इन सब साधनों के अपनाए जाने पर भी सभी साधकों के योग सिद्धि में समय का अंतर रहता है । इस अन्तर का करण है साधनों की गति तीव्र अथवा धीमी होना। जो साधक पूर्ण श्रद्धा से नियमित रूप से योग साधना में लगे रहते हैं उन्हें शीघ्र लाभ मिलता है । साधनों की शिथिलता से विलंब होता है । विलम्ब का कारण यह भी होता है कि या तो मार्ग में आई विघ्न बाधाओं से घबराकर छोड़ देते हैं या सिद्धियों का प्रदर्शन करने लगते हैं । पूर्ण श्रद्धा का न होना भी कारण होता है । अतः इनसे वचन बचकर चलने वाला शीघ्र लाभ प्राप्त करता है ।
स्रोत– पतञ्जलि योग सूत्र
लेखन एवं प्रेषण —
पं. बलराम शरण शुक्ल हरिद्वार













