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इंसानियत

मोहल्ले की दीवार पर चिपका
एक बड़ा सा कागज, सबको दिखा था।
उस पर कुछ लिखा था।
आम आदमी हैरत से
उसे देख रहा था, पढ़ रहा था।
बार-बार पढ़ रहा था।
” गुमशुदा की तलाश”
उस पर लिखा था।
” दंभ, लोभ, मोह, ईर्ष्या,अहंकार,
अनाचार, अत्याचार और हैवानियत
की भीड़ से जो हरदम
अकेली ही जूझती थी,
कहीं खो गई है वो इंसानियत।
जिस किसी को भी मिले
कृपया वापस निम्न पते पर
पहुंचा दें और उचित ही इनाम लें।
पता — श्रीमती धरा,
” सत्य भवन”, अहिंसा मार्ग
भारतवर्ष
आम आदमी हैरान था।
कहां ढूंढे वह इंसानियत

सुलेखा चटर्जी, भोपाल

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