Uncategorized
Trending

परमेश्वर

परमाज्ञानी, परम यशस्वी,
परम पुनीत परम बलशाली।
जिसके सम्मुख नत होते हैं,
रावण अधम महा बलि बाली।।

जो नायक ब्रह्माण्ड का भी है,
ग्रह, नक्षत्र जिसमें आ बसते।
जिसके वैभव की धारा में,
सब निज का हँस वैभव खोते।।

जो नीरज सा कोमल किन्तू,
है कठोर हीरे-सा अतुलित।
जिसकी सदा निखरती कान्ति,
जिसके दम, प्रसून हों मुकुलित।।

अजर, अमर, निर्लिप्त, अजन्मा,
जो सबके उर बसता है।
नदियों की धारा में चलकर,
जो सबके ढ़िंग रहता है।।

सन-सन चलती हवा नरम जब,
वह सबको सुख देता है।
खाय थपेड़े जब मानुष तब,
सबका वही प्रजेता है।।

झरनों में झरता है कर कल,
कोयल कूँक रही डाली।
चिड़ियों में वह विविध शब्द कर,
बोले ज्यों मधुमय प्याली।।

चितवन मधुर, चोर वह सबका,
हृदय चुरा ले लेता है।
माया-पाश फेंककर सबको,
मरकट नाई नचाता है।।

राजा हो या रंक, विप्र हो,
या चण्डाल अछूता हो।
सबमें उसका वास सदा से,
क्या कभी किसी ने पूछा हो?

कण-कण में वह बसा-रमा है,
शैल शिखर, हिमवानों में।
धरती, नभ, दश दिशा कर रहीं,
जय-जयकार, तूफानों में।।

वही रमा, उसकी सब लीला,
पत्ते-पत्ते में है छाप।
कहो कहाँ वह नहीं रमा है,
देखो, सुनु उसकी पदचाप।।

सूखे पत्ते संग गिरता वह,
फूलों में खिलकर हँसता।
नवाबालाओं में दिखता है,
नारी के मन में कहता।।

आस भरे वह, करे पूर्ण,
संकल्प सदा उर में नित वह।
अंग-अंग में प्रकृति के छाया,
हर प्राणी के अंग-अंग में वह।।

उसके बिना जगह न खाली,
इसीलिए कहलाता व्यापक।
विरज, विष्णु वह, शिव, कैलासी,
ब्रम्हा के कर्मों में नायक।।

धरती, नभ, दिशि में जहँ होती,
हलचल वही दिखाता है।
परिवर्तन में सतत् खिले वह,
नयी-नयी सृष्टि कराता है।।

कारण है वह, पालक भी वह,
प्रलयकाल का स्वामी है।
मेघों में, रवि, शशि, में रहता,
गतिमान सदा, अति गामी है।।

आँखों से वह झाँक रहा है,
सबको देता है सन्देश।
एको ब्रम्ह द्वितीयो नास्ति,
योगी लखें सदा अनिमेष।।

अन्धकार में वही घूमता,
सबको सदा डराता है।
पाप-पुण्य, यश-अपयश जग में ,
हानि-लाभ करवाता है।।

वही काल है, कर्म वही है,
फलदाता है वह ईश्वर।
अतुलित बल प्रताप है उसका,
कहलाता वह परमेश्वर।।

सृष्टिचक्र में वही रमा है,
उसका सदा राज चलता।
सबमें होकर, परे है सबसे,
उसमें ही सब-कुछ ढ़लता।।

उदय-अस्त वह, तरुणाई है,
प्रात वही सन्ध्या वो ही।
सबमें बोले, करे सभी में,
भजन-कीर्तन में वो ही।।

धर्म-कर्म, अधरम छाया में,
मतिभ्रम करता है मन की।
किसे उठा दे, किसे गिरा दे,
जान सके न नर गति ही।

विषय-भोग में फँसा कभी वह,
कभी करावे वह सत्संग।
ज्ञानी हैं फकीर जो फक्कड,
उनमें रहता है निस्संग।।

माया उसकी चेरी कहिये,
लक्ष्मी चरण दबाती है।
सरस्वती, दुर्गा, सब जोगिन,
उसके ही गुण गाती हैं।।

सबमें रमा अलग वह सबसे,
उससे सब-कुछ चलता है।
अगर मूँद ले नयन बन्द हों,
काज सभी, जग पलता है।।

और कहूँ क्या योगी, ऋषि-मुनि,
किन्नर, नाग और गन्धर्व।
सती, यती में वह बैठा है,
सुन्दर, होते हैं जब पर्व।।

लहराता है अमर बेल-सा,
नहीं जानता कुम्हलाना।
आदि-अन्त से रहित सदा,
लेता अवतार, प्रबल बाना।।

सबका दु:ख हरता है हर पल,
जो भी उसका ध्यान करे।
पूजा-पाठ, जपन में उसको,
लखे हृदय में, मान हरे।।

अहंकार का वह दुश्मन है,
रहन न देता है अहंकार।
पल भर में वह नष्ट करे है,
देकर दु:ख अगणित हर बार।।

विनयशील उसको भाता है,
जो है परम हितैषी जान।
शुद्ध, हृदय, मन पावन जिसका,
उसके उर बस जाता आन।।

उससे कभी दूर न होता,
उसका करता है सम्मान।
उस हित वह दु:ख भी सहता है,
को जग, प्रकृति में ताहि समान?

दिनकर-सा है प्रखर तीक्ष्ण वह,
शशि-सागर-सा शीतल गहरा।
वेद-पुराण, उपनिषद में वह,
धर्म ग्रन्थ में उसका पहरा।।

जीवन ज्योति वही है सबमें,
मौत वही, जब आती है।
खेल खेलता नर जीवन में,
उसकी छबि उर भाती है।।

उससे अच्छा कहाँ जगत में,
कहाँ ढूँढ़ने पर पाओ?
उसके जैसा एक वही है,
उसके ही नित गुण गाओ।।

वही रुदन में, हँसने में वह,
शिशु, वयस्क में वह रमता।
पशु-पक्षी, नभ-जलचर प्राणी,
भू प्राणी में वह वसता।।

हाहाकार वही करता है,
वही गहे अमृत धारा।
शत्रु-मित्र, नर-नारी में वह,
पत्थर-पत्थर में प्यारा।।

वही मूर्ति में, वही शून्य है,
निर्विचार वह अविकारी।
निर्विकार गुण एक उसी का,
बसी सभी में छबि न्यारी।।

रुप, नाम से रहित है निर्गुण,
रहता सदा अचिंचित है।
सगुण रुप धारण वह करता है,
सब आकारों में जित है।।

अनसूया वह, सदा एकरस,
अजर,अमर है अविनासी।
उसकी यश, गौरव गाथा के,
सभी पारखी है सांची।।

हस्तरेख में, कर्मलेख में,
मूलाधार, अनाहद में।
स्वाधिष्ठान और मणिपुर में,
रहे सदा वह हर पद में।।

हर अक्षर में वही रमा है,
हर बोली में वो कहलाय।
सभी रंग जग में हैं उसके,
उस सा है क्या, कहीं दिखाय?


पं० जुगल किशोर त्रिपाठी (साहित्यकार)
बम्हौरी, मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *