
रस- भक्ति रस
अलंकार- अनुप्रास अलंकार
गोवर्धन पूजा का आया मनोरम त्योहार,
धरती माँ ने किया यहा अद्भुत श्रृंगार।
उत्सव अंनकुट से हो रही खुशियाँ अपार,
आओ मिलकर मनाए हम सब त्योहार।।
श्री कृष्ण जब मुरली मधुर बजायेगे,
गोप- गोपिया बनकर हम आनंद उठायेंगे।
नहीं किसी से भी लजायेंगे नहीं शर्मायेगे,
ये दृश्य देखकर देवी- देवता धरा पे आजायेंगे।।
कृष्ण की शरण में आकर,
भक्त नया जीवन पाते हैं।
सच्चे मन से कर ये त्योहार,
खुशीयाँ अपार पाते हैं।।
स्नेह से कृष्ण का नाम जपो,
दिल की हर इच्छा पूरी होगी।
कृष्ण भक्ति में लीन हो जाओ,
उनकी महिमा जीवन खुशहाल कर देगी।।
कविता रचनाकार-
नंदकिशोर गौतम
(माध्यमिक शिक्षक)
शास. उच्च. माध्य. विधा. बकोडी, जिला सिवनी (म.प्र.)













