
बाप चोर था, बेटा चूहाड़ बन गया ,
सत्ता के लोभ में हूंराड़ बन गया।
आज कुतलकड़ा सा बनकर घूमते हैं गाँव-गाँव,
भीख मांगता हैं, जहाँ मिला मौका, वहीं शिकार धार लिया।
बाप चोर था, बेटा चूहाड़ बन गया।
चारा खा गया, जानवरों का निवाला खा गया,
खेत, खलिहान , इंसानियत खा गया।
गाँव-गाँव शमशान बना दिया,
नरसंहार कर दिया, जाट-पात में झगड़ा कर दिया।
बाप चोर था, बेटा चूहाड़ बन गया।
आज साधु बनने का ढोंग करता है,
झूठ-मूठ के बाद करता फिरता है।
अपने घरों में नोटों के अंबार भर लिया,
सत्ता की भूख में चोर, डकैत, डाकू बन गया।
बाप चोर था, बेटा चूहाड़ बन गया।
धर्म के ठिकेदार खुद को बताता है,
खुद अनपढ़ है और दूसरों को ज्ञान बांटता फिरता है।
चोरी करने में बाप के भी बाप गया,
बिल्कुल दो-मुँहा सांप गया।
बाप चोर था, बेटा चूहाड़ बन गया।
आर एस लॉस्टम













