
सोंधी मिट्टी की खुशबू,
मन को मेरे भाए,
ये गाँव की माटी है,
जहाँ जीवन मुस्काए।
पगडंडी पर धूप-छाँव का,
वो बचपन पुराना,
खेतों की हरियाली देखो,
जैसे माँ का हो बिछौना।
बारिश की पहली बूँद,
जब धरती को छू जाए,
माटी का हर कण कण,
एक प्यारा गीत गुनगुनाए।
नदी किनारे,पीपल की छाँव,
हमें याद बहुत है आए,
ये गाँव की माटी है,
जहाँ जीवन मुस्काए।
बुजुर्गों की चौपाल यहाँ,
रिश्तों का वो प्यार,
गाय-बैल,चिड़ियों की धुन,
सादा जीवन-सार।
शहर की दौड़ में खोया,
वो अपना सा किनारा,
मिट्टी छू के फिर से जागे,
हर सपना हमारा।
परदेसी मन,राह देख के,
दौड़ा-दौड़ा आए,
ये गाँव की माटी है,
जहाँ जीवन मुस्काए।
मेहनत का पसीना इसमें,
खुशहाली उगाता है,
त्याग और तपस्या की,
हर कहानी सुनाता है।
जन्म लिया है जिस पर हमने,
ये वो पवित्र स्थान है,
इस माटी को नमन हमारा,
ये हमारी पहचान है।
जीवन का हर रंग इसी में,
मिलके हम रंग जाए,
ये गाँव की माटी है,
जहाँ जीवन मुस्काए।
सोंधी मिट्टी की खुशबू,
मन को मेरे भाए,
ये गाँव की माटी है,
जहाँ जीवन मुस्काए।
रीना पटले (शिक्षिका)
शास हाई स्कूल ऐरमा (क













