
(गीत – ओम कश्यप)
इंसान है रब की सबसे ख़ूबसूरत सोच,
हर दिल में बसी है उसकी कोई एक रोशनी की लोच।
मिट्टी से बना, पर सपना आसमान का,
इसी में बसता है करिश्मा, भगवान का।
इंसान, ओ इंसान…
तेरी हँसी में है खुदा की पहचान।
प्यार से जो देखे, वही है असली धन,
“ओम” कहे – यही है जीवन का तन-मन।
जब तू दर्द मिटाए, खुदा मुस्कुराए,
तेरे कर्मों से ही दुनिया जगमगाए।
रंग नहीं, जात नहीं, बस भावनाओं का खेल,
इंसान बने तो बन जाए दुनिया का मेल।
इंसान, ओ इंसान…
तेरे कदमों से सजे सारा जहान।
नेकी की राह पे जो चले सदा मन,
“ओम” गाए – तू है रब का चयन।
जब गिरा तो उठाया तूने,
जब हँसा तो खिलाया तूने।
तेरी आँखों में बसता सारा जहां,
ईश्वर की रचना, तू ही तो है इंसान।
इंसान, ओ इंसान…
तेरे दिल में है खुदा की जान।
प्यार बाँट दे, जग में कर उजियारा,
“ओम” बोले – बस यही है सहारा।













