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पल दो पल


  पल दो पल ही सही,तुम साथ चलो। 
  पल दो पल ही सही,चुप रहो, ना बोलो।
   ना तुम कुछ कहो, ना मैं कुछ कहूं,
  भाव सरिता बहने दो,बस साथ चलो।

  जब समय था, तुम कह ना सके।
   वह चुप्पी हम सह न सके
     शायद समय की यही मांग थी,
 वर्षों बाद ,वही तुम थे वही मैं थी।

  आज, पल दो पल का साथ तुम्हारा,
     याद दिलाता है वो अतीत हमारा।
      जीवन में समय आता है,बेजुबान
      खामोशी सब कह जाता है।

       वर्षों बाद मिले  "ये दो पल"
        जीवन भर की थाती होंगे।
        यादों के गलियारों में अपने
          जीवन भर के साथी होंगे!!!
                   सुलेखा चटर्जी

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