
कवि: ओम कश्यप
धरती पर आई हरियाली,
मन में छा गई खुशहाली।
पत्तों ने ओढ़ी नई चादर,
फूलों में महकी सुरभि प्याली।।
आसमान भी हँसता झूमे,
बादल करें गीत रूमानी।
नदिया गुनगुनाए स्वर में,
प्रकृति लगे अब जादू की रानी।।
बयार चली जब खेतों में,
लहराई सोने सी फसल।
हर किसान की आँखों में,
उम्मीदों का चमकता पल।।
पेड़ों की छाँव में ठंडी सांसें,
मिट्टी की खुशबू अनमोल।
हरियाली का यह पर्व निराला,
जीवन को दे जाए गोल-गोल।।
हे मानव! मत काट पेड़ों को,
इनसे ही तो साँसें पाई।
संभाल ले इस हरियाली को,
यही तो धरती की सच्ची कमाई।।













