
सूर्य देव की होती पूजा,
गंगा तट पर जलते दीये।
छठ मैया का व्रत है पावन,
सुख-समृद्धि सबको दीये।
बाँस की टोकरी,
कोसी भरा प्रसाद,
मन में लिए श्रद्धा,
जीवन में सबके हो प्रभात।
लोकगीतों से गूँजे घाट,
आस्था का यह पर्व महान।
छठ पूजा की महिमा न्यारी,
प्रकृति से जुड़ा है यह सम्मान।
यह केवल पूजा नहीं,
यह आस्था का सैलाब है,
हर मानव के लिए,
यह अपनों का ख्वाब है।
गाँव-शहर से दूर-दूर से,
आते हैं सब लोग,
करें प्रार्थना छठी मैया से,
मिटा दो सारे मन के रोग।
सामूहिकता का अद्भुत दृश्य,
छू लेता है हर मन को,
भेदभाव को भूलाकर अब,
एक घाट पर मिलते सब।
व्रत की कठोरता,
देती आत्मिक बल,
शुद्ध होकर मिलता है,
जीवन का सब हल।
इसलिए,छठ पर्व की,
महिमा है अपरंपार,
भर देता है जीवन में
खुशियों से सबका संसार।
रीना पटले (शिक्षिका)
शास हाई स्कूल ऐरमा (कुरई)
सिवनी (मध्यप्रदेश)













