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आँगन बुलाता है


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आँगन बुलाता है,सुन ले पुकार।
यादों की डोरी,ले जाए पार।।

वो मिट्टी की खुशबू,वो बचपन का शोर,
दौड़ी चली आ,थाम ले ये डोर।
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पीपल की छाँव,झूले की मस्ती,
गुड्डे-गुड़ियों की सजती थी बस्ती
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छत पर सितारों से बातें पुरानी,
दादी की लोरी,और किस्से कहानी।

सूखे पत्तों का वो बिछोना मुलायम,
पाँव छूकर लगे,जैसे कोई हो मरहम।
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अब शहर की राहों में थक गए कदम,
खो गया सुकून, आँखें हैं नम।

फिर भी लगे है जैसे हवा गुनगुनाती,
“लौट आ रे पथिक,तेरी राह देखती माटी”।
आँगन बुलाता है,सुन ले पुकार,
यादों की डोरी,ले जाए पार।

​रीना पटले /(शिक्षिका)
शास हाई स्कूल ऐरमा (कुरई) जिला -सिवनी (मध्य प्रदेश)

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