
कौशल
जहाँ मिट्टी की खुशबू में, राम-सीता के पग निशान,
वहीं उगे पाँचों पावन वृक्ष, बन जाएँ ज्ञान विधान।
बरगद देता साहस दिल को, पीपल श्वास बनाए,
बेल संग शिव कृपा बरसे, अशोक दुख-दर्द मिटाए।
आंवला का हर मीठा फल, स्वास्थ्य की सौगात,
छाया-छाया खेलें बच्चे, सीखें धरती का साथ।
यह आंगन नहीं, जीवन है, हरियाली का घराना,
हर पत्ता जब लहराए, गाए प्रकृति तराना।
आओ मिलकर थामें कलियाँ, बचपन को मुस्काने दो,
पानी, धूप और प्रेम संग, पंचवटी को बढ़ने दो।
वृक्ष न हों केवल पौधे, यह भविष्य का खजाना,
इनके संग हम सीखेंगे— धरती माँ का दिव्य फ़साना।













