
जिसे लिखते, जिसे पढ़ते,
ज्ञान जिससे अर्जित करते,
देश, काल और परिस्थिति का
चित्र मन में अंकित करते।।
समाज का दर्पण कहलाता,
समाज के साथ चलता है,
तभी तो हर एक युग में
इसका प्रतिरूप बदलता है।।
साहित्य ज्ञान की वह ज्योति,
मनुष्य को जो जगाती है,
सोए हुए पुरुष को भी
ओज से यह भर देती है।।
संस्कारों की गंगा यह
विचारों की सरिता है,
भावों का सुंदर सागर है,
यह मानवता की कविता है।।
कभी कथा, कभी कविता
कभी गद्य का रूप धरे,
जन-जन के हृदयों में
भावों के दीपक भरे।।
शब्दों का यह अमृत स्रोत,
संवेदना के हेतु है,
यह जोड़ता मनुष्य को,
धर्म, जाति, क्षेत्र सेतु है।।
साहित्य वह दीप ज्योति
जो अंधकार हर लेती है,
मानव को मानव बनाना —
इसकी ही विधि कहती है।।
सदा यह सत्य उगलता है
कलम की तकत बतलाता
जो लिख दे जीवन का सार
वही सच्चा साहित्यकार है।।
स्वरचित पुष्पा पाठक छतरपुर मध्य प्रदेश













