
उसने प्यार में भी सौदा किया,
मैंने सौदों में भी प्यार किया।
वो हर बात पे मुड़ जाती है,
मैंने हर जख्म को स्वीकार किया।
वो अक्सर अपने वादे भूल गई,
मैंने हर भूल को इकरार किया।
मैं तो सदा उसी का था,
फिर भी उसने इनकार किया।
वो छलती रही मुस्कानों में,
मैंने हर दर्द को त्यौहार किया।
आर एस लॉस्टम













