क्षीरसागर विहारी श्रीमन,
तेरे चरणों में मेरा नमन !
आया हूं तुम्हारे शरण,
करदो सारे दुखों का शमन!!
सहारा तुम्हीं हो मेरे,
न छोड़ो कसम है तुझे !
प्रज्ञा की ज्योति जला ,
तमस से निकालो मुझे !!
मनसा वाचा करूं अर्चना,
मानव सेवा की हो भावना!!
मैं शतपथ का राही बनूं ,
हो न विचलित मेरी साधना !!
‘जिज्ञासु’ जन करें अर्चना ,
तुमसे है यही प्रार्थना !
रहें सब सुखी सर्वदा,
सर्वजन किहो ये कामना !!
कमलेश विष्णु सिंह ‘जिज्ञासु’













