
आओ कुछ हम कहें, कुछ तुम्हारी सुनें,
थोड़ा सुकून बाँटें, कुछ दर्द चुनें।
थोड़ा रंग भरें इस बेरंग जीवन में,
थोड़ी धूप रख दें ठिठुरती किरन में।
कहानी अधूरी है, चलो पूरी करें,
टूटी हुई यादों को फिर दूरी करें।
जो ख़्वाब बिखरे हैं राहों में कहीं,
उन्हें फिर से जोड़ें मोहब्बत के यहीं।
बातों में छिपा एक मौसम नया,
मुस्कानों में खिलता उजाला नया।
थोड़ा तुम कहो, थोड़ा मैं सुनूँ,
इस खामोशी में जीवन को गुनूँ।
रंगों की चाह में कुछ पल ठहर जाएँ,
थकान भरे दिल में फिर आस जगाएँ।
बेरंग दिनों में रंग भरें हम यूँ,
जैसे बरसात लिख दे धूप का जुनून।
आओ कुछ हम कहें, कुछ तुम्हारी सुनें,
थोड़ा सुकून बाँटें, कुछ दर्द चुनें।
आर एस लॉस्टम













