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आभार—समर्पण


(डॉ. गुंडाल विजय कुमार जी के लिए)

आपकी वाणी में करुणा है,
आपके कर्म में सेवा है।
हर दिल को जो छू ले ऐसा,
आपका निर्मल व्यवहार सदा अमिट मेवा है।

ज्ञान की धारा जो बहती है,
वह आपकी तप-साधना है।
मुस्कानों में जो उजाला है,
वह आपकी मन-सरिता की साधना है।

जिसने भी पाया आपका सान्निध्य,
उसे मिला मार्गदर्शन का दीप।
आपकी सुगंधित सरलता से,
हर मन हुआ है पुलकित, अतीव।

हर कदम पर आपके उपकारों को,
शब्दों में बाँधना कठिन है।
पर हृदय से उठता एक ही भाव —
“धन्यवाद” कहना भी कितना लघु है।

फिर भी आज विनम्र प्रणाम सहित,
एक संदेश यही कहता हूँ —
आपके स्नेह, समर्थन, प्रेरणा हेतु
हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।

योगेश गहतोड़ी “यश”

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