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नियम ,दंड और छूट

​जीवन एक सफ़र,नियम इसकी राहें,
तोड़ोगे जो राहें,मिलेगा दंड भरोगे आहें!

पर क्षमा भी है साथी,देती छूट की आस,
ये तीन धागे मिलकर बुनते,जीवन का लिबास!

पहला साथी नियम,ये है अनुशासन का दीप,
घर हो या सड़क,या हो कर्मभूमि के क़रीब।

नियम ही सिखाते हैं,सम्मान से जीना,
नियम ना हो तो फिर,क्या खोना क्या पाना?

जीवन एक सफ़र,नियम इसकी राहें,
तोड़ोगे जो राहें, मिलेगा दंड भरोगे आहें।

तब आता है दंड,जैसे बिजली की कड़क,
सिखाने को वापस,सही राह की सड़क।

चोट लगती है जब,तब सबक याद आता है,
क़ानून का डर भी तो,समाज चलाता है।

पर कठोरता ही सब कुछ,नहीं इस जग में,
दया का भी झरना बहता,हर एक पग में।

छूट है वो उम्मीद,जो राहत देती है,
ग़लती मान ले कोई,तो माफ़ी मिलती है।

क़ैदी की सज़ा में कमी,या क़र्ज़ में रियायत,
ईश्वर की कृपा है ये,हर मुश्किल की शिकायत।

रीना पटले (शिक्षिका)
शास हाई स्कूल ऐरमा (कुरई)
जिला सिवनी (मध्यप्रदेश)

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