
बचपन प्यारा मधुर मधुर
अलबेला मतवाला सा
न किसी बात की चिंता मन में
मासूम सा निराला सा
बचपन प्यारा मधुर मधुर
अलबेला मतवाला सा
उछलकूद में दिन बीत जाता
भाई बहन संग लड़ाई देर रात
धूम धड़का में गुजर जाता
फिर एक साथ खेलना कूदना
सच कैसा ये बचपन सुहाना सा
बचपन प्यारा मधुर मधुर
अलबेला सा मतवाला सा
कभी खाने में नखरे हजार
कभी जिद ले चलो पापा बाजार
तरह तरह के खिलौने देख
लेने को हो जाते तैयार
न में सिर हिलाने से पहले ही
मायूस हो मुंह को उतार लेते
मुंह फुलाने का अंदाज भी होता अनोखा सा
बचपन प्यारा मधुर मधुर
अलबेला मतवाला सा
श्रीमती अंजना दिलीप दास
बसना,महासमुंद (छत्तीसगढ़)













