
बच्चों की दुनिया सुखद सरल
कभी शांत कभी होतीचंचल ,
बच्चों की दुनिया सुखद सरल,
हँसी मीठी उनकी, करती विह्वल ।।
मन उनका निर्मल, नित निश्चल,
उनके भाव बहुत ही कोमल
दुख का विष भी न बने गरल,
जब पास हों बच्चे पल- छिन पल।।
सपनों की धारा बहे तरल,
जैसे सतत बहता मधुर जल।
उनका हर क्षण उजला–निर्मल,
बच्चों का मन है सचमुच सरल।।
पुष्पा पाठक छतरपुर मध्य प्रदेश













