
जो कल के सपनों के रक्षक हैं,
आज मासूमियत में रमे हुए।
राह दिखाना हमारा फ़र्ज़ है,
क्योंकि कदम उनके अभी थमे हुए।
छोटी-सी दुनिया, बड़े सवाल,
पर समझ अभी न पनपी है।
हम ही बनें उनके मार्गदर्शक,
क्योंकि उम्र अभी न ढल पाई है।
मनमानी को कैसे खुला छोड़ दें,
जब भटका सकता है हर मोड़।
संवारना होगा इन नन्हे हाथों को,
यही तो है जीवन की सबसे बड़ी होड़।
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखंड सरायपाली













