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वह डायरी


ठंड का मौसम कड़कड़ाती सर्द हवाएं वह अजीब सी गांव की शांति और मैं अंजना,मेरी एक विज्ञापन कंपनी है जिसकी मैं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हूं और मेरा कारोबार बहुत अच्छी तरह से चल रहा था। मेरा जीवन जो कि दूर से काफी आनंदमय और शानदार लग सकता है और कई मायनों तक है भी पर आप सिर्फ तब तक ही सुखमय जीवन जी सकते है जब तक आप कुछ गलत ना कर दे या आपसे कोई गलती ना हो जाए उसके बाद तो सिर्फ एक गलती और सातवें आसमान से आप सीधा ज़मीन पर मिलेंगे आपकी सारी अच्छाई मिट्टी में मिल जाएगी और ऐसी ही एक गलती मुझसे हुई थीं, एक बार मेरे ऑफिस में मेल आया जिसमें लिखा हुआ था कि एक कंपनी है जो कि अपने शेयर्स हमें बेचना चाह रही है मैने तो पहले इनकार ही कर दिया था पर फिर मैने सोचा, कि अभी हमारे कारोबार को लाभ भी बहुत हुआ है, मुझे इनके शेयर्स खरीद लेने चाहिए और मैने खरीद लिए फिर कुछ दिनों बाद मुझे पता चला कि मैने जो भी शेयर्स खरीदे थे वे सब बेकार थे और मेरे सारे पैसे डूब गए और वो कंपनी भी फ्रॉड निकली इस घटना के बाद मेरे बिजनेस में मुझे सिर्फ घाटा ही होने लगा , मेरे जितने भी व्यापार सहयोगी और सहकर्मी थे सब मेरी काबिलियत पर सवाल उठने लगे और यह सारे वही लोग थे जो मेरी हां में हां मिलाया करते थे मुझे अपना आदर्श कहा करते थे यह यह सारी चीज देखकर मैं डिप्रेशन में जाने लगी और मेरे माता-पिता चिंतित हो गए उन्होंने मुझे हमारे (पुराने घर) गांव भेज दिया जहां मेरा बचपन बीता था।
उन दिनों में , मैं सिर्फ यही सारी बातें सोच कर उदास रहा करती थी इसीलिए नानी मुझे काम दे दिया करती ताकि मेरा ध्यान बटा रहे । एक दिन मुझे अलमारी साफ करने का काम मिला और फिर वहां मुझे मिली
वह डायरी ,बरसों पुरानी एक डायरी जो न जाने कब से इस अलमारी में चुपचाप सिमटी पड़ी है । आज जब अलमारी खुली तो कुछ यादें खुली , मेरी वह पुरानी नीली डायरी जो मुझे चीख – चीख कर कह रही थी “तुम्हें याद है तुम एक समय में क्या थी तुमने कितनी दिक्कतों का सामना अकेले किया था जरा पल्टो समय के पन्नों को और देखो खुद को तुम जो आज इस छोटी सी मुश्किल का सामना करने से डर रही हो देखो ज़रा गुज़रे हुए समय में तुमने इससे कहीं बड़ी-बड़ी मुश्किलों का सामना किया है । आज जो तुम इस छोटी सी गलती के कारण खुद की कीमत तय कर रही हो इस एक गलती से तुम खुद को कमजोर समझ रही हो अपना आत्मविश्वास खो रही हो तुम्हारा संघर्ष तुम भूल सकती हो पर मैं नहीं
तुम जो हो अपनी मेहनत से हो अपने बल बुते पे हो जरा पढ़ के देखो खुदको , खुद की कहानी को
तब तुम्हें एहसास होगा कि तुम पहले क्या थी और अब क्या हो!!

अधिष्ठा दास
कक्षा 11वीं
विकासखंड बसना

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