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मेरा प्यार,मेरा सुरूर।

जब घना अंधियारा छाया हो,
या खुशियों का संदेशा आया हो।
मन्नू बस प्यार की मुझे जरूरत है,
या यह केवल मेरे दिल की चाहत है।।

संकट से कभी मैं घिरा हुआ हो,
जब बाधाओं को पार किया हो।
हरपल दिल ने उसको याद किया है,
सदैव उसे प्यार का पैगाम दिया है ।।

थका,हारा या जब हुआ निराश,
मन्नू तुमने ही दिया मुझे विश्वास है।
हर संकट में सदा साथ दिया है,
मेरे ख्वा़बों को परवा़ज दिया है।।

तूं मेरा प्यार,मेरा ही सुरूर है,
मन्नू सदा तुझपे ही मुझे गुरूर है ।
मेरे हाथो में तुने हाथ दिया है,
शमां बन मुझे रोशन किया है।।

स्वरचित..मौलिक,अप्रकाशित
एंव सर्वाधिकार सुरक्षित है ।।

मुन्ना राम मेघवाल
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।

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