
हमारे विलक्षण छत्तीसगढ़ की,
मैं अदभुत बात बताती हूं।
प्राकृतिक सौंदर्य से निहित,
मुक्कमल राज्य की कहानी कहती हूं।
विद्युत और इस्पात का जहां पर,
उत्पादन बरसता है।
खेती किसानी छत्तीसगढ़ का
मुख्य धंधा कहलाता है।
क्षेत्रफल के नजर में यह,
भारत का 10 वा स्थान पाता है।
जनसंख्या की दृष्टि से यह,
ढाई सौ करोड़ पहुंचता हैं।
यहां की अमूल्य संस्कृति में,
दुर्लभता स्थापित है।।
आदिवासी परंपरा की ऐतिहासिक जानकारी है।
पंथी सुआ और ददरिया,
पंडवानी गाई जाती है।
मेलो और त्योहारों में यहां पर,
खुशियां मन को भाती है।
लुगड़ा और पोलखा पहनकर,
महिलाएं इतराती है।
पगड़ी और धोती पहनकर ,
पुरूष भी ठसक दिखाते हैं।
कई वीरों की खान यहां पर,
जिसने प्राण गवाए है।
आजादी के जंग में हमेशा,
आगे ही आए हैं।
चित्रकूट के जल प्रपात के,
बेहतरीन नजारे है।
मन मोहती तीरथ गढ़ में,
पर्यटकों के बसेरे है।
भोरमदेव के प्राचीन मंदिर,
शिवजी को समर्पित है।
और यहां की कांकेर घाटी,
कुदरत का खजाना भरती है।
आधिकारिक भाषा यहां की,
हिंदी बोली जाती है।
छत्तीसगढ़ी भाषा यहां की,
प्रमुखता दर्शाती है।
यहां की जनता सीधी सादी,
सरल जीवन जीती है।
सहयोगी और पारंपरिक को,
जीवन का ध्येय बनाती हैं।
इस तरह इस मिट्टी पर ये,
भर भर प्यार लुटाती है।
आपस मे यह भाईचारे का ,
मूल मंत्र बताती है।
भारत की यह वैदिक धरती
यहां की गाथा निराली है।
यह के माटी के हर कतरे में,
बसती छत्तीसगढ़ महतारी हैं।
श्रीमती अहिल्या नायक
विकासखंड सरायपाली












