
शीर्षक – किताबें
किताबें यदि बोलती तो ,
बताती दिल ए हाल सबका,
वो मन से पढ़ा हुआ और,
वो मन रखने के लिए पढ़ा हुआ।
हां यदि किताबें बोलती तो,
बताती वो रंग पन्नों के,
अपने के सपनों के,
हर पल हर किस्से के।
किताबें बहुत कुछ कहती है,
जरुरत बस उसे बुनने की है,
वो किताब के साथ सामंजस्य चुनने का है,
वो सफ़र किताबों तक करना है।
हां यदि किताबें बात करती तो,
ये दिखावे की दुनिया में,
सच की चमक निराली होती,
हां किताबें बोलती होती।
हां किताबें बोलती होती,
सब से सब कुछ कहती होगी,
लेखिका कवि-नीतू धाकड़ अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश












