
तिमिरता को चीरते हुए,
सुंदर नव भोर हुआ ।
नई तरंगें लिए नव उमंगों ,
का अंजोर हुआ।
कोई परीक्षा की तैयारी ,
में जुटा रहा ।
कोई उन्नति की ओर,
अग्रसर हुआ ।
आपाधापी शुरू हो गई ,
आगे आगे बढ़ने को।
अंगड़ाई लेकर बच्चे उठे,
विद्यालय जाके पढ़ने को।
सुहानी सुबह चिड़िया चहक रहीं,
तैयारी में है उड़ने को ।
अपने बच्चों के पोषण की खातिर,
दाना दाना चुनने को ।
श्रीमती अंजना दिलीप दास
बसना, महासमुंद (छत्तीसगढ़)












