
बेटी जब दुनिया में आती,
तो अपने संग वो खुशियाँ है लाती।
ठुमक- ठुमक कर जब वो चलती,
तो सारी दुनिया है मुस्काती ।।
बेटी ही परिवार सजाती,
बेटी ही परिवार बनाती।
बेटी जब माँ बनती तो,
परिवार का वो काम चलती ।।
हीरा अगर है बेटा,
तो मोती हैं बेटियाँ।
काँटों पर ये चलकर,
ताज सजाती हैं बेटियाँ।।
वो ही लड़की ,
वो ही बहुरानी।
वो ही सास,
और माँ भी कहलाती।।
रचनाकार- नंदकिशोर गौतम (माध्यमिक शिक्षक)
शास. उच्च. माध्य. विद्यालय बकोडी, ब्लॉक कुरई, जिला सिवनी (म. प्र.)












