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सौदागर

दोहा—
सौदागर कई रूप में,मिलते हैं
सरकार।

देखो उनके काम को,फिर करना स्वीकार।।

कोई धन का सौदागर है,कोई मन
का सौदागर है,
कोई मुस्कान देता है कोई आंसू का सौदागर है।।

किसी के शब्दोंमें जादू,किसी की ख़ामोशी बोले,
किसीकी झोली में वादे, कोई  सच भी बोले हौले।।

कोई दौलत का तराज़ू ले दिलों का सौदा करता है,
कोई नीयत से दिल की, दरो-दीवार खोलता है।।

कोई नक़ाब लगाकर दुनिया को छल जाता है,
कोई आँखों में सच्चाई भर कर सामने आ जाता है।।
इस दुनिया में सौदागर तो लाखों मिलते हैं,
कुछ राह बदलते हैं, कुछ दिल बदल देते हैं।।
पर जो रूह तक उतर जाए अपनेपन की ख़ुशबू से,
वही असली सौदागर कहलाने की क़ाबिलियत रखता है।।
जो साथ निभाए सिर्फ़ मान–सम्मान के लिए,
वही जीवन का सच्चा सौदागर होता है।

पुष्पा पाठक छतरपुर मध्य प्रदेश

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