
प्रेम का मसीहा हूं मैं ,
प्रेम की बातें बताता हुं ,
मोह से सच्चे प्रेम की कहानी ,
मै लोगो को सुनाता हूं।
कण कण में जिसके प्रेम बसे है,
उसे ही मै मनुष्य कहता हूं ।
राधा के प्रेम और मीरा के विश्वास की
मधुर तान सुनाता हूं ।
प्रियतम से जो हारे उसे मैं,
सफल इंसान बतलाता हूं
जो मनाए प्यार से अपनी रूठी सीता को ,
उसी को मै राम कहता हूं ।
छल कपट और प्रेम में मैं ,
दुनिया को अंतर दिखलाता हूं।
आकर्षण, मोह, प्रेम ,त्याग
यही प्रेम की परिभाषा तो,
मैं सबको बतलाता हूं।
मसीहा हूं मैं प्रेम का,
प्रेम की बातें बतलाता हूं।
Adistha Das
Class 11
सरायपाली












