
दोस्ती का दीप जले तो मन में उजियारा भर जाए।
सुख-दुख की राहों में आकर साथीपना संग लाए।
दिल में अपनापन जगकर डोरी स्नेह सम्हालती।
जीवन-पथ के कांटे हरदम मिलकर दूर हटाती।
बिन बोले मन की भाषा यार सहज पहचान सके।
अंधियारे क्षण में आकर हिम्मत की लौ तान सके।
हंसी की कोमल लय से मन का बोझ उतर जाए।
दर्द भरे पल में आकर सीने से वह लग जाए।
दूरी कितनी बढ़ जाए पर मन से दूरी न होती।
यादों की खुशबू से हरदम राहें मधुरिम ही होती।
विश्वासों की नींव गहरी रिश्ता सच्चा कहलाए।
झूठे जग में सच्चा मित्र ही संबल बनकर आए।
थककर जब कदम रुके तो कंधा आगे बढ़ देता।
टूटी उम्मीदों में फिर से हौसला नया भर देता।
चलो दोस्ती का दीपक मिलकर जग में आज जलाएँ।
जीवनभर हर मोड़ कठिन में साथ निभाते जाएँ।
कौशल












