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कुछ लिखते हैं


विद्या – कविता
शीर्षक – जिंदगी के खट्टे-मीठे रंग

​ज़िंदगी है एक सफ़र सुहाना,
हर मोड़ पे इक नया तराना।
कुछ धूप है यहाँ, कुछ छाँव घनी है,
इन खट्टे-मीठे रंगों से,जीने के ढंगों से,
अद्वीतीय प्रसंगों से, जिंदगी बनी है।

​कभी शहद सी मीठी बातें हों,
सपनों भरी मुलाक़ातें हों।
फूल खिले, दिल झूमे हवा में,
नूर भरा हो हर एक दुआ में।
पर कभी-कभी मिर्च का तीखापन,
आँखों में भर जाए ये खालीपन।
गिर के संभलना, सीखे हैं हम,
यही तो है हिम्मत, यही तो है दम।

​कभी नीम की पत्ती सा कड़वा स्वाद,
याद दिलाए बीते दिन की याद।
टूटे जो दिल, तो आस टूटती है,
ज़मीन पाँव से क्यूँ छूटती है?
पर फिर उसी कड़वाहट के बाद,
मीठे पल की क़ीमत हो ज़्यादा।
हर एक ज़ख्म का इलाज है समय,
चलता रहे ये प्यार का सिलसिला, न थमे।

​ये खट्टा-मीठा मिला जुला एहसास,
रखता है दिल को जीवन के पास।
हर रंग को तुम प्यार से जियो,
थोड़ा मुस्कुराओ, थोड़ा रो भी लो।
हाँ, ये ही हैं खट्टे-मीठे रंग,
जीने का ढंग, ये जीवन का संग।
ज़िंदगी!

       रीना पटले,शिक्षिका 
  शास. हाई स्कूल ऐरमा, कुरई 
     जिला- सिवनी,मध्यप्रदेश

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