
बुराई का विष
करो पान, उतारो ना उदर,
चुपचाप करो ग्रहण।
स्थितप्रज्ञ हो जब
षडरिपुओं को दो सब मात,
ईश बसाओ मनमंदिर।
सत्य अवश्य बोलो,
अप्रिय सत्य ना हो देखो,
मन मत दुखाओ।
याचना करें शत्रु
द्विधाहीन हो उसे करो प्रदान।
सदैव होगा कल्याण।
सत्यम् शिवम् सुंदरम्।
सब शिवमय हो जाए,यह
तब तुम जानोगे।
सुलेखा चटर्जी
26 –2– 25












