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संवेदना

मन में धूप जगी जब, पावस भाव उमंग।
संवेदित पुलकित मन, जागे कोमल रंग।।

जीवन सफल वही है, जहाँ हृदय उदार।
संवेदित स्नेहप्रभ से, मिटता दुख-अँधियार।।

नयनों में करुणा हो, वाणी मधुर प्रकाश।
संवेदित चरण जब हों, खिलता प्रेम सुवास।।

मानव वही महान, जहाँ भाव प्रकाश।
संवेदित अंतर्मन, बसता दया निवास।।

जहाँ भाव मिलें मन में, हृदय वहाँ विकसित।
संवेदित चेतन हो, जीवन रहे अन्वित।।

नित स्नेह जगे भीतर, संवेदित हों प्राण।
भाव मिले जब अंतर में, जीवन बने वरदान।।

जब अश्रु किसी के हों, हृदय बने आधार।
संवेदित अनुभूति से, मिटता मन का भार।।

करुणा से उपजे जो, वही बने संसार।
संवेदित भावों से, निर्मित प्रेम आधार।।

नत मस्तक जीवन में, भाव भरे व्यवहार।
संवेदित मन-दृष्टि से, जग होता साकार।।

वह दीप्ति हृदय में हो, जो कर दे उज्ज्वल।
संवेदित अंतर्मन में, खिले भाव निर्मल।।

योगेश गहतोड़ी “यश”

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