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पापा की परी।।

पलकों पे रखा एक सपना सजाकर,
जहाँ को दिखाना है बेटी को आईएएस बनाकर।
मेरे विश्वास की आखरी उम्मीद है बेटी,
अपनी मम्मी की सच्ची सहेली है बेटी।।

हमारे आँगन का गहना है यह बेटी,
मेरे अंंतःमन का अतुल्य भाव है बेटी।
उसकी झलक से खिल उठते है पुष्प सारे,
उसकी मुस्कान के सामने फिकें है मोती सारे।।

जब वो आंगन में ना दिखे पलभर के लिए,
ग़र हो जाये बीमार कुछ क्षण के लिए।
डॉक्टर को दिखाने जाते है दौड़कर सारे,
चिंता में खो जाते है हम परिजन सारे।।

हम सब की पहली चाहत है बेटी,
हमारे जीवन की बागडोर है बेटी।
हमारे संस्कारो का पूर्णतः सार है बेटी,
हमारे ख्वा़बो का अंतिम छोर है बेटी।।


मुन्ना राम मेघवाल।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।

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