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त्रिभाषा संगम

संगम प्रथम त्रिदेव का,
ब्रह्मा, विष्णु, महेश।
जग कर्ता, भर्ता,जगहर्ता,
कहत शारदा शेष।
संगम त्रिकाल में,
भूत,भविष्य और वर्तमान में।
गीता,रामायण,भागवत ,त्रियोग में,
कर्म, भक्ति, ज्ञान में।
संगम त्रिशूल, त्रिनेत्र, बिल्वपत्र में।
तिथि में वार में,
योग, नक्षत्र में।
गंगा, सरस्वती,
यमुना प्रवाह में।
श्रद्धा, विस्वास में
ईश्वर की चाह में।
त्रिगुण, त्रिलोक में,
संगम त्रिभाषा में,
हिन्दी, संस्कृत,तमिल की भाषा में।
क्षेत्रीय, प्रान्तीय,राष्ट्रीय भाषा,
सब हैं महत्वपूर्ण,
सबकी परिभाषा।
संगम त्रिपाठी ने संगम कराया है।
हिन्दी. हो राष्ट्र भाषा,
बीड़ा उठाया है।

रचना- बलराम प्रसाद द्विवेदी
सुन्दरदादर (सन्दरी)
उमरिया- मध्य-प्रदेश

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