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सुनहरी यादें बीते साल की

सच, बहुत प्यारी होती हैं बिताए पल की यादें
ऐसा लगता है कि कल की ही बातें हैं
ये अपनों की यादें
वो गांव से दादा-दादी का आना
मुझे ना रहा खुशी का ठिकाना
दादा -दादी का मेरे लिए मेथी के लड्डू, तिल के लड्डू का लाना
प्यार से सराबोर उनकी मीठी बातें
आज भी उनकी मधुर यादें आती हैं
और मैं प्यार के सपने में खो जाती हूं
बीते साल बीते लम्हें बहुत कुछ सीखा कर गुजरी है
दादा -दादी के साथ मन्दिर पापा के साथ गाड़ी में बैठकर जाना दादा -दादी अपने आशीर्वाद की तो जैसे
झंड़ियां ही लगा देती
पापा – मम्मी फूले नहीं समाते
सच बुजुर्गों को सम्मान देना चाहिए
जी-जान से उनकी सेवा करनी चाहिए
उनके आशीर्वाद से ही हम फूलते -फलते हैं
मुझे तो उनका बहुत आशीर्वाद मिला है
आज मैं जिस मुकाम पे हूं उनके आशीर्वाद से ही हूं मेरी जिंदगी की सुनहरी यादें दादा -दादी के साथ बिताए गये पल ही हैं
बाकी तो उनके आशीर्वाद से बड़ी -बड़ी जिम्मेदारीयांँ निभाती ग‌ई
आज भी मैं उनसे सुनी कहानियाँ
याद है मुझे अपने बच्चों को सुनाती हूं
उनकी कहानियों से बहुत प्रेरणा मिलती है
उनके दिए गये संस्कार को नहीं भूली
आज भी भी उनके साथ हर वो बात को मैं अपनी यादों में बसाई हु‌ई हूं
वो बिताए पल और यादें दिल को आज भी शुकून दे जाते हैं
उनकी यादों को कोटि-कोटि नमन

डॉ मीना कुमारी परिहार

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