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नर्मदे हर – हर- सुरक्षित सब घर


कल- कल बहती नर्मदा, पावन सुंदर घाट।
सुता है महाकाल की, अद्भुत अनुपम ठाठ।।

निर्मल जल की धार है – तृप्त करें संसार।
हर कंकर शंकर बना, महादेव शृंगार।

गंग मैया स्नान करें, खेले यमुना रास।
दर्शन की महिमा बड़ी, रेवा मैया खास।।

पूजन अर्चन दीप से, श्रद्धा भक्ति अपार।
धन्न धान्य परिपूर्ण हो, सुखी रहें परिवार।।

करते परिक्रमा भाव से,जन-जन का विश्वास।
घाट- घाट मंदिर सजे, साधु संत की आस।।

अमर पावनी नर्मदा, निर्मल मीठी नीर।
बोलो हर – हर नर्मदे, हरती सबकी पीर।।

जीवन भर-नर्मदे हर
सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू ‘

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