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गणतंत्र दिवस

तिरंगा झूम कर नभ में, नया पैगाम लाया है।
शहादत की बदौलत आज, ये प्यारा दिन आया है।

​नज़र में शान भारत की, दिलों में प्यार बसता है,
वतन की आबरू ने फिर, हमें अपना बनाया है।

​लहू से सींच कर जिसको, वतन आज़ाद है अपना,
उसी गुलशन को वीरों ने, बड़ी हसरत से सजाया है।

​न कोई ऊँचा है यहाँ, न कोई नीचे रहता है,
संविधान ने हमको, वो सारे हक दिलाया है।

​तिरंगा हाथ में लेकर, कसम मिलजुल के हम खाएं,
मिटा देंगे उसे जिसने, वतन पे सर उठाया है।

तिरंगा झूम कर नभ में, नया पैगाम लाया है,
शहीदों की बदौलत ही, सुहाना वक्त लाया है।

​हुई गणतंत्र की स्थापना, मिटा सब भेद भारत में,
संविधान हाथों में, लिए आयाम लाया है।

​सजा हर ओर खुशियों से, वतन का कोना-कोना है,
हवाओं में तिरंगे का, मधुर पैगाम लाया है।

​मिटाकर नफ़रतें दिल से, बढ़ाएं हाथ उल्फ़त का,
महोत्सव देश-भक्ति का, हसीं मुकाम लाया है।

​सलामत रहे सदा यूं ही, यही दुआ हम करते हैं,
कि भारत विश्व में अपना, सुनहरा नाम लाया है।

रीना पटले, शिक्षिका

शासकीय हाई स्कूल ऐरमा कुरई
जिला सिवनी मध्यप्रदेश

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