
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि गणतंत्र दिवस की पावन पूर्व संध्या पर कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार के तत्वावधान में आयोजित 233वीं कल्पकथा साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी विषय “गणतंत्रोत्सव” अत्यंत गरिमामय, भावप्रवण एवं राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत वातावरण में सम्पन्न हुई। यह साहित्यिक आयोजन दो चरणों में तथा चार घंटों से अधिक समय तक सतत् राष्ट्रभावना की दिव्य प्रवाहधारा के साथ चलता रहा।
काव्यगोष्ठी में देशभक्ति, सैनिकों के अमर बलिदान, भारतीय सेना के शौर्य-पराक्रम, भारतीय संविधान के महत्त्व, लोकतांत्रिक गणतंत्र की महिमा, गणतंत्रोत्सव का उल्लास तथा भारत माता के गौरवपूर्ण सम्मान पर आधारित सशक्त, ओजस्वी एवं भावप्रवण काव्य रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया गया। सम्पूर्ण आयोजन राष्ट्रचेतना, सांस्कृतिक गरिमा एवं साहित्यिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बनकर उपस्थित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ, जिसका सुमधुर एवं भक्तिमय प्रस्तुतीकरण विजय रघुनाथराव डांगे नागपुर, महाराष्ट्र द्वारा किया गया। कार्यक्रम संचालन कल्पकथा परिवार से पवनेश मिश्र द्वारा अत्यंत संयम, गरिमा एवं साहित्यिक सौष्ठव के साथ सम्पन्न हुआ।
इस राष्ट्रभक्ति विशेष आयोजन की अध्यक्षता भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’ इटावा, उत्तर प्रदेश ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. श्रीमती इंदु जैन ‘इंदु’ की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में देशभर से जुड़े विद्वान सृजनकारों की सशक्त सहभागिता ने आयोजन को बहुआयामी साहित्यिक ऊँचाइयों तक पहुँचाया। सहभागी सृजनकारों में बिनोद कुमार पाण्डेय, अमित पण्डा अमिट रोशनाई, ज्योति प्यासी, श्याम बिहारी मिश्र, आनंदी नौटियाल अमृता, पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, रमेश चंद्रा गौतम, दिनेश कुमार दुबे ,ज्योति राघव सिंह, हेमचंद्र सकलानी, कीर्ति त्यागी, ज्योतिषाचार्य श्री जितेन्द्र शास्त्री, वसुंधरा रजक, विजय कुमार शर्मा, विजय रघुनाथराव डांगे, डॉ इंदु जैन इंदु, दीदी राधा श्री शर्मा, पवनेश मिश्र आदि प्रमुख रहे।
कार्यक्रम के समापन चरण में राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150वें स्मरणोत्सव वर्ष के पावन अवसर पर अमर बलिदानी स्वतंत्रता सेनानियों एवं सैन्यवीरों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए सामूहिक वन्दे मातरम् गायन किया गया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण राष्ट्रभक्ति और देशप्रेम की दिव्य चेतना से आप्लावित हो उठा।
तत्पश्चात कल्पकथा साहित्य संस्था की संस्थापक दीदी राधा श्री शर्मा द्वारा आमंत्रित अतिथियों, सहभागी विद्वान साहित्यकारों, कवियों, सृजनकारों, के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करते हुए कार्यक्रम को भावपूर्ण गरिमा के साथ विश्राम प्रदान किया गया।









