Uncategorized
Trending

गांधी जी के प्रयाण पर

गांधी और गोडसे दो व्यक्तित्व है
दो भिन्न विचारधाराएं हैं
दोनों का अस्तित्व है

विचारधाराएं शरीर नहीं,
समय के अनुकूल है
एक पक्ष में अनुकूल हैं
तो दूसरे मे प्रतिकूल हैं

व्यक्ति मरते हैं,
वे आज नहीं तो कल मरते हैं!
विचारधाराएं अक्षुण्ण हैं
वे आदि है अनंत हैं

ये गंगा यमुना सरस्वती हैं
प्रकृति रूपेण संस्थिता
गांधी जी को गए
पौनी शताब्दी हुई समाप्त

एक शताब्दी के बाद
तो परिवर्तन आता ही है
गांधी जी के सिद्धांत से
आज भी हमारा नाता है

गांधी जी को गोडसे ने नहीं
मैंने और तुमने मारा है
सियासतदानों के लिए
बस यही एक सहारा है

ओ सियासत दानों
गांधी -गोडसे को लेकर
मत फेंको मुर्गी दाने
नहीं तो चने लोहे के चबाने

गांधी जी को
मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि
समय प्रवाहमान है
मेरी अंजुरी में पुष्पांजलि

राम वल्लभ गुप्त ‘ इदौरी’

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *