
विधा-काव्य
बडप्पन का जहाँ सम्मान होता है
बड़ों का वहाँ आशीर्वाद होता है
बडप्पन अनुभवों की खान होता है
जीवन के बारीक निचोड़ का ज्ञान होता है
प्रभु का आशीर्वाद उनके रचित ज्ञान शाष्त्र है
बड़ों का आशीर्वाद उनके जीवन के दर्शन शाष्त्र है
योग्यता बडप्पन की कसौटी पर ही कसा जाता है
किताबी ज्ञान के निचोड़ से अनिवार्यत बडप्पन का परिमापन नही किया जाता है
बड़ों का बडप्पन उनके जीवन अनुसन्धान से परिलक्षित होता है
वजह बड़ों के आशीर्वाद मे जीवन सार छिपा होता है
देवों से पहले बड़ों की महत्ता बतायी जाती है
आशीर्वाद से उपर अनुभवों की महिमा दिखायी जाती है
मृत्यु लोक मे देवों को भी बड़ों का आशीर्वाद लेना पड़ा
खुद से भी पहले बड़ों को स्थान देना पड़ा
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र












