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रंगों का भी एक रंग

रंगों का भी तो कोई रंग होता होगा,
उनका भी कोई जीने का ढंग होता होगा।
यूँ ही नहीं बिखरते होंगे वे संसार में,
उनका भी कोई अपना प्रसंग होता होगा।

लोगों ने यूँ ही बदनाम कर रखा है,
काले, पीले, नीले — न जाने कितने नाम से;
पर हर रंग की अपनी पहचान रही होगी,
उनका भी तो कोई उपनाम होता होगा।

जो काला है, शायद गहराई कहाता हो,
जो पीला है, संभव है उजियारा बन जाता हो;
नीला कहीं शांति का आकाश हो,
लाल प्रेम का धड़कता राज़ होता होगा।

रंग सिर्फ रंग नहीं होते,
भावों की भाषा, आत्मा का संग होते हैं;
हर रंग के भीतर छुपा एक जीवन है,
उनका भी अपना कोई ढंग होता होगा।
आर एस लॉस्टम

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