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मोक्ष के पथिक – छाया की वापसी

1. जंगल का अभियान

अंजना, राजन और बलदेव ने कुछ गाँववालों के साथ जंगल की ओर पैदल अभियान किया।
जंगल में अजीब-सी खामोशी थी; हर पेड़ की हलचल पर उनकी नज़र टिकी हुई थी।
थोड़ी दूर जाने पर उन्हें सच्चाई का आभास हुआ—
वे आगंतुक वास्तव में कुछ शिकारी और लुटेरे थे,
जो गाँव की संपत्ति पर नज़र गड़ाए हुए थे।
राजन ने फुसफुसाते हुए कहा—
“अब हमें उनकी चाल समझनी होगी। हम जल्दबाज़ी में हमला नहीं करेंगे,
बल्कि उनकी कमजोरी का फायदा उठाएँगे।”
बलदेव ने सहमति में सिर हिलाया। अब उसमें पहले जैसी उतावली नहीं, बल्कि संयम दिखाई दे रहा था।
2. सत्य और साहस की योजना

गाँव लौटकर अंजना ने सभा बुलाई।
“हमारे पास सबसे बड़ा हथियार है— सत्य, साहस और सामूहिक शक्ति।
हम डर के खिलाफ लड़ेंगे, लेकिन केवल हिंसा से नहीं।
हर व्यक्ति की भूमिका तय होगी, हर कदम सोच-समझकर उठाया जाएगा।
यही हमारी नई शक्ति है।”
बलदेव ने दृढ़ स्वर में कहा—
“मैं अपने पुराने अनुभव से जानता हूँ कि डर कैसे फैलता है।
हम इसका सामना समझदारी से करेंगे।
इस बार मैं उन्हें भ्रमित करूँगा, ताकि वे स्वयं ही जाल में फँस जाएँ।”
गाँववालों के चेहरों पर विश्वास लौटने लगा।
3. पहला संघर्ष और विजय

अगली सुबह जब आगंतुक गाँव के पास पहुँचे,
तो गाँव पूरी तरह तैयार था।
बलदेव ने अपनी पुरानी रणनीति और चतुराई से उन्हें भ्रमित कर दिया।
अंजना और राजन ने गाँववालों को सुरक्षित स्थान पर रखा।
आगंतुक समझ ही नहीं पाए कि कब वे स्वयं जंगल के भीतर उलझ गए।
उनकी योजना असफल हो गई।
उस दिन गाँव ने पहली बार महसूस किया—
सत्य, साहस और सामूहिक समझ से डर को हराया जा सकता है।
4. भविष्य की झलक

उस दिन गाँव ने न केवल डर को हराया,
बल्कि एक नया पाठ भी सीखा—
सत्य के साथ साहस, और साहस के साथ बुद्धिमानी।
अंजना ने सभा में कहा—
“गाँव अब केवल अपने लिए नहीं, अपने भविष्य के लिए भी जी रहा है।
जो अतीत में हुआ, वह सीख है;
और जो भविष्य में होगा, वह हमारी तैयारी पर निर्भर करेगा।”
सूरज फिर से गाँव की गलियों में चमका।
हर चेहरे पर आशा की रेखाएँ थीं।
बलदेव ने पहली बार स्वयं से कहा—
“अब मैं डर का प्रतीक नहीं, सुरक्षा और सीख का प्रतीक बनूँगा।
यही मेरी नई यात्रा है।”

आर एस लॉस्टम

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