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ग़ज़ल


तीरगी में नई रोशनी दे गया।
आज कोई मुझे ज़िंदगी दे गया।

ले गया साथ सारे गमों के असर,
वो मुझे सब जहां की ख़ुशी दे गया।

एक बादल गुज़र कर गया पास से,
वो हवाओं में थोड़ी नमी दे गया।

पास आकर लगाया गले इस तरह,
तनबदन में हंसी सरसरी दे गया।

जब तलक वो रहा राह भर साथ में,
आज सीखें कई काम की दे गया।

जोड़कर इक नया प्यार का वास्ता,
बंदगी के लिए दोस्ती दे गया।
—–नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार मप्र

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