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मूल्य

जीवन का सच्चा धन है मूल्य,
इनसे ही जग में बढ़ता कुल।
सत्य, दया और प्रेम के रंग,
भरते मन में मधुर तरंग।

मानवता की ये पहचान,
इनसे होता जग कल्याण।
लोभ-मोह जब घेरें राह,
मूल्य दिखाएँ सच्ची चाह।

संस्कारों की गहरी जड़,
इनसे ऊँचा उठता कद।
संकट में जो साथ निभाएँ,
वही मूल्य जीवन सजाएँ।

धन-दौलत सब रह जाए,
मूल्य सदा संग चल जाए।
चरित्र बने जब दृढ़-बलवान,
चमके जीवन का आकाश महान।

नेकी की राह जो अपनाए,
सम्मान जगत में वह पाए।
मूल्य ही मानव का श्रृंगार,
इनसे होता जीवन साकार।

कौशल
मुड़पार चु
जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़

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