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लिव -इन रिलेशनशिप क्या है?

लिव -इन रिलेशनशिप क्या है?
इससे न‌ई पीढ़ी को कैसे बचा सकते हैं?

   लिव -इन रिलेशनशिप एक ऐसी व्यवस्था है

जिसमें दो लोग जिनका विवाह नहीं हुआ है ‌‌लेकिन एक साथ रहते हैं र एक पति -पत्नी की तरह आपस में शारीरिक संबंध बनाते हैं यह संबंध स्नेह से भरा होता हैं और रिश्ता भी गहरा होता है
लिव -इन रिलेशनशिप का चलन बहुत तेजी से शुरू हो चुका है। लेकिन आज भी भारत जैसे देश में लिव इन रिलेशनशिप को बुरी नजर से देखा जा रहा है। कहने को हम और आप कितने भी मॉडर्न क्यों ना हो जाएं ,लेकिन आज भी हमारे समाज में लिव -इन रिलेशनशिप को बुरी नजर से देखा जाता है।
आज समय बदल रहा है बदलते वक्त के साथ समाज और रिश्तों की परिभाषा भी बदल गई है।
खासकर बड़े शहरों में लिव- इन रिलेशनशिप का कांसेप्ट युवाओं को बहुत भा रहा है, मगर ऐसे रिश्तों का अंत सुखद ही हो यह जरूरी नहीं है।
अब सवाल यह उठता है की नई पीढ़ी को हम
इस से कैसे बचाएं..
अगर माता-पिता शुरू से ही बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देने लगे तो भविष्य में बच्चा किसी भी तरह की पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों को उठाने से दूर नहीं भागेगा। लिव -इन रिलेशन में रहने वाले जोड़े पर किसी भी तरह की सामाजिक और परिवारिक जिम्मेदारियां नहीं होती हैं। इतना ही नहीं दोनों पार्टनर के बीच वित्तीय जिम्मेदारियां भी बंटी होती हैं। यही कारण है कि युवा वर्ग बोझिल जिम्मेदारियों से निजात पाने के लिए लिव -इन रिलेशनशिप में रहने लगते हैं।
ऐसा देखा जाता है कि कई बार युवाओं के द्वारा उठाए कदमों पर सही राय देने वाले नहीं मिलते हैं। आसपास के माहौल और कुछ नया कोशिश करने की चाहत में वह कुछ ऐसे कदम उठा लेते हैं। हद तो तब हो जाती है जब शहर में रहने वाले युवा इस चाहत को पूरा करने के लिए भाई -बहन का मुखौटा पहन लेते हैं। भाई -बहन के रिश्ते को बदनाम कर देते हैं।
फैशन में चाहे जो भी चीजें चल रही हों या आपके आसपास का माहौल चाहे कितना भी दबाव क्यों ना बनाएं, युवाओं को खुद यह समझने की आवश्यकता है कि आप जो करने जा रहे हैं वह कितना सही है।
आपको कोई फैसला लेने से पहले ही उसके परिणामों का सही है या गलत, आकलन कर लेना चाहिए। बिना सोचे विचारे कोई फैसला नहीं लेना चाहिए।
युवाओं को अपने कुशलता के साथ अपनी कला को तलाशने का प्रयास करना चाहिए। इससे वे अपने जीवन में जल्दी संतुष्ट हो जाएंगे, और पारिवारिक सुखों का भरपूर आनंद ले पाएंगे।
लिव -इन रिलेशनशिप में रहने वाले कई युवा का
यह मानना है कि वो एक दूसरे को जानने के लिए साथ में रहते हैं। यदि साथ रहने का अनुभव सही नहीं रहा तो वो ब्रेकअप कर लेंगे। ऐसे में कई लोग भावनाओं से खेलते हैं। समाज को यह शिकार करना होगा कि शादी के बाद भी यदि जोड़ों को रिश्ता बोझिल लगे तो वो अलग हो जाएं। युवाओं को इस चीज की स्वतंत्रता देनी चाहिए और स्वाभिमान मुक्त
जीवन निर्वाह का मौका देना चाहिए।
हमारा समाज अभी भी कुंठित विचारधारा से बाहर नहीं निकल पाया है। यदि कोई युवा किसी दूसरे जाति या धर्म के साथ वैवाहिक संबंध बनाना चाहता है तो समाज उसे एक नहीं होने देता है। इसी समाज के डर से युवा लिव- इन रिलेशनशिप में रहकर अपनी चाहत को पूरा करते हैं और सुकून भरा जीवन जीते हैं। उन्हें यह किसी भी प्रकार से गलत नहीं लगता।
यदि समाज अपनी संस्कृति की परवाह कर रहा है तो उसे जातिवाद ,धर्मवाद ,रूढ़िवादिता की मानसिकता से ऊपर उठना होगा। अपने बच्चों के फैसले का सम्मान करना चाहिए। आपको उनकी हर बातों पर ध्यान देना चाहिए । सही सलाह और मार्गदर्शन करना चाहिए।

डॉ मीना कुमारी परिहार

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